नैनीताल की भागदौड़ और शोर-शराबे से दूर, पहाड़ों की गोद में एक ऐसी जगह है जहाँ समय जैसे ठहर गया है। यह है एबॉट्सफोर्ड एस्टेट (Abbotsford Estate), जिसे 'प्रसादा भवन' के नाम से भी जाना जाता है।
अगर आप एक ऐसी जगह की तलाश में हैं जहाँ आप इतिहास की कहानियों में खो सकें, चिड़ियों की चहचहाहट के साथ सुबह की शुरुआत कर सकें और अपनी चाय की चुस्कियों के साथ पुरानी यादों को ताज़ा कर सकें, तो यह जगह आपके लिए ही बनी है।
एक पुरानी विरासत का अहसास इस एस्टेट की नींव 1876 में एक अंग्रेज़ अधिकारी, जॉन होप सिम्पसन ने रखी थी। बाद में, 1903 में यह प्रसादा परिवार के पास आई और तब से यह एक आत्मीय 'होमस्टे' (Homestay) के रूप में विकसित हुई। जब आप इसके दरवाज़े से अंदर कदम रखते हैं, तो आपको महसूस होगा कि आप किसी 19वीं सदी के उपन्यास के पन्नों में आ गए हैं। लकड़ी की छत, पाइनवुड का फर्श और घर के कोने-कोने में सजे एंटीक पीस—सब कुछ पुरानी यादों को ताज़ा कर देता है।
यहाँ रहने का अनुभव कैसा है? एबॉट्सफोर्ड में रहने का मतलब है प्रकृति के साथ जुड़ना। यहाँ तीन अलग-अलग विंग्स हैं—एबॉट्सफोर्ड हाउस, वर्ड्सवर्थ कॉटेज और नया बना एप्स्ली हाउस। हर कमरा अपने आप में अनूठा है। आप बालकनी में बैठकर घंटों पहाड़ों के नज़ारे देख सकते हैं, जहाँ से मिस्ट (धुंध) और बादलों का खेल देखना किसी जादू से कम नहीं है।
'कैफे चीका' और जायके का तड़का यहाँ का 'कैफे चीका' (Cafe Chica) किसी जन्नत से कम नहीं है। ताजी हवा, खुले लॉन और पहाड़ों के नज़ारों के बीच बैठकर लंच या डिनर करना एक यादगार अनुभव होता है। यहाँ आपको घर के स्वाद वाला खाना मिलता है, जिसमें स्थानीय कुमाऊँनी व्यंजनों की एक अलग ही महक है। शाम को अलाव (bonfire) के पास बैठकर कहानियों का आदान-प्रदान करना, इस जगह को और भी खास बनाता है।
क्यों जाएँ एबॉट्सफोर्ड?
शांति के लिए: अगर आप शहर की भीड़-भाड़ से थक चुके हैं, तो यह जगह आपकी थकान मिटाने के लिए परफेक्ट है।
बर्ड वॉचिंग और नेचर वॉक: प्रकृति प्रेमियों के लिए यह किसी खज़ाने से कम नहीं है।
किताबों और सुकून के लिए: अपनी पसंदीदा किताब उठाइए और यहाँ की लाइब्रेरी या बगीचे में बैठकर घंटों बिता दीजिए।
नैनीताल की भीड़ से मात्र कुछ दूरी पर स्थित यह एस्टेट आपको वह सुकून देगा, जिसकी अक्सर हम शहर में रहते हुए कल्पना करते हैं। अगर आप अगली बार पहाड़ों की ओर रुख करें, तो एबॉट्सफोर्ड की इन शांत गलियों और पुरानी हवेली की मेहमाननवाज़ी को अपने सफर का हिस्सा ज़रूर बनाएँ।
यह महज़ एक होटल नहीं है, बल्कि एक अनुभव है—जहाँ इतिहास, प्रकृति और प्यार का संगम होता है!
