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घुघुतिया त्योहार: कुमाऊं की अनोखी परंपरा और इसकी पूरी जानकारी

 

घुघुतिया त्योहार: कुमाऊं की अनोखी परंपरा और इसकी पूरी जानकारी


Ghughutiya


घुघुतिया क्या है? (What is Ghughutiya Festival)

घुघुतिया या घुघुती त्यार उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र का एक प्रमुख पारंपरिक त्योहार है जो हर साल मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है। यह त्योहार आमतौर पर 14-15 जनवरी को आता है और विशेष रूप से बच्चों के लिए बेहद खास होता है। इस दिन गेहूं के आटे और गुड़ से बनी मिठाइयां बनाई जाती हैं जिन्हें घुघुते या घुघुत कहा जाता है।

घुघुतिया त्योहार कब मनाया जाता है? (When is Ghughutiya Celebrated)

घुघुतिया त्योहार मकर संक्रांति के दिन मनाया जाता है, जो हर साल 14 या 15 जनवरी को पड़ती है। यह दिन सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है और इसे बेहद शुभ माना जाता है। कुमाऊं में इस त्योहार को घुघुतिया, घुघुती या घुघुत के नाम से जाना जाता है।

घुघुतिया त्योहार की कहानी और इतिहास (Story Behind Ghughutiya)

चंद राजवंश की पौराणिक कथा

घुघुतिया त्योहार से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध कहानी कुमाऊं के चंद राजवंश से संबंधित है। कथा के अनुसार, एक बार चंद वंश के राजा युद्ध के लिए गए थे। उनकी अनुपस्थिति में शत्रुओं ने अफवाह फैला दी कि राजा युद्ध में मारे गए हैं।

इस खबर से रानी और प्रजा में शोक की लहर दौड़ गई। लेकिन कौवों ने सच्चाई का संदेश लाया कि राजा जीवित हैं और विजयी होकर लौट रहे हैं। जब राजा सुरक्षित वापस आए, तो रानी और प्रजा ने खुशी से कौवों का आभार व्यक्त करने के लिए विशेष मिठाइयां बनाईं।

इन मिठाइयों को पक्षियों और अन्य शुभ आकृतियों का रूप दिया गया और कौवों को खिलाया गया। तभी से यह परंपरा घुघुतिया त्योहार के रूप में मनाई जाने लगी।

पूर्वजों को श्रद्धांजलि

हिंदू परंपरा में कौवों को पितरों या पूर्वजों की आत्माओं का वाहक माना जाता है। इसलिए घुघुतिया पर कौवों को खिलाना अपने दिवंगत प्रियजनों को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने का तरीका है।

घुघुते कैसे बनाए जाते हैं? (How to Make Ghughute)

घुघुते बनाने की सामग्री (Ingredients)

  • गेहूं का आटा (2-3 किलो)
  • गुड़ (1-1.5 किलो)
  • देसी घी या तेल (तलने के लिए)
  • पानी (आवश्यकतानुसार)
  • इलायची या सौंफ (वैकल्पिक, स्वाद के लिए)

घुघुते बनाने की विधि (Recipe)

  1. सबसे पहले गुड़ को पानी में घोलकर चाशनी बनाएं और छान लें
  2. गेहूं के आटे में गुड़ की चाशनी मिलाकर सख्त आटा गूंथें
  3. इस आटे से विभिन्न आकृतियां बनाएं जैसे पक्षी, तलवार, ढाल, फूल, पत्ते, डमरू आदि
  4. बीच में छेद बनाएं ताकि बाद में माला में पिरोया जा सके
  5. इन्हें गर्म घी या तेल में सुनहरा होने तक तलें
  6. ठंडा होने पर धागे में पिरोकर माला बना लें

घुघुते के आकार (Shapes of Ghughute)

परंपरागत रूप से घुघुते इन आकारों में बनाए जाते हैं:

  • काले कौवे और अन्य पक्षी
  • तलवार और ढाल (वीरता का प्रतीक)
  • फूल और पत्ते
  • डमरू (भगवान शिव का प्रतीक)
  • घंटी और अन्य शुभ चिन्ह

घुघुतिया त्योहार कैसे मनाया जाता है? (How to Celebrate Ghughutiya)

सुबह की रस्में

घुघुतिया के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद घुघुतों की माला पहनी जाती है। बच्चे विशेष रूप से इन मालाओं को पहनकर बेहद खुश होते हैं।

कौवों को बुलाना

बच्चे घर की छत या आंगन में जाकर कौवों को बुलाते हैं और पारंपरिक गीत गाते हैं:

"काले कव्वा काले, घुघुती माला खा ले!"

इस समय घुघुतों की माला से कुछ टुकड़े तोड़कर कौवों और अन्य पक्षियों को खिलाए जाते हैं।

परिवार के साथ उत्सव

परिवार के सभी सदस्य एक साथ मिलकर घुघुते खाते हैं और त्योहार की खुशियां मनाते हैं। रिश्तेदारों और पड़ोसियों में भी घुघुतों की माला बांटी जाती है।

घुघुतिया त्योहार का महत्व (Significance of Ghughutiya)

सांस्कृतिक महत्व

घुघुतिया त्योहार कुमाऊं की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवित रखता है और नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़े रखता है।

प्रकृति के प्रति सम्मान

पक्षियों को खिलाने की परंपरा प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान और कृतज्ञता दर्शाती है। यह हमें याद

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